क्या यह संभव है की हर्निएटेड डिस्क को उसकी जगह पर पुनः स्थापित किया जा सके ? नहीं, हम हर्निएटेड डिस्क को पूर्णतयाः उसकी मूल जगह पर तो नहीं ला सकते हैं, लेकिन व्यायाम और सहायक चिकित्सा के माध्यम से उसकी सूजन दर्द को कम कर सकते हैं। समय के साथ हमारा शरीर भी हर्निएटेड डिस्क को हील करता हैं, व्यायाम से इसको और बल मिलता है। हर्निएटेड डिस्क की स्थिति पर निर्भर करता है की वो कितने समय में स्वंय को ठीक कर पाती है। सर्जरी के अलावा कुछ उपचार के माध्यमों से हर्निएटेड डिस्क की सूजन को कम किया जा सकता है जो इस प्रकार से हैं-
- आयुर्वेदिक उपचार ( कटी वस्ती, पोटली मसाज, कप थेरेपी, भाप चिकित्सा)
- योग और कसरत
- Physical therapy
- Low-impact exercise
- Pilates or yoga
- Chiropractic care
- Acupuncture
- Therapeutic massage
इस पोस्ट में जानने की कोशिश करते हैं कि व्यायाम के माध्यम से हम कितना स्वंय को फायदा पहुँचा सकते हैं। कुछ ऐसी कसरत, एक्सरसाइजेज हैं जिन्हे करके हम हर्निएटेड डिस्क के कारण नसों पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकते हैं। कोई भी कसरत करने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर प्राप्त कर लें क्योंकि व्यक्ति विशेष के अनुसार व्यायाम करने का तरीका, अवधि अलग अलग हो सकती है। जो हुआ वो तो हो चुका हैं लेकिन अब कोई ऐसी मूर्खता नहीं करनी है जिसके कारन से जो स्थिति है उससे भी बदतर हो जाय। हौंसला रखें और कोशिश करें कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है। आइये व्यायाम के माध्यम से मांसपेशियों को मजबूत करते हैं। योगासनों से शरीर में ऐसे चमत्कारिक द्रव्यों का सृजन होता हैं जिससे उम्मीद से भी ज्यादा फायदा मिलता है।
भुजंगासन
“भुजंग” शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है। भुजंग का अर्थ सर्प होता है, इसलिए भुजंग-आसन को “सर्प आसन” भी कहा जाता है। भुजंगासन से तात्पर्य हैं शरीर को साँप के फन की तरह से अपने अग्र हिस्से को उठाना। इस आसन से मासपेशियाँ मजबूत होती हैं और डिस्क पर उसकी मूल जगह की और जाने के लिए दबाव बनता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर भी बहुत हद तक लचीला हो जाता है और साथ ही साथ शरीर को सख्त होने से रोकता है।

कमर दर्द के लिए भुजंगासन करने का सही तरीक़ा निम्न प्रकार से हैं -
- भुजंग आसन करने के लिए सर्वप्रथम किसी तख्ते या फ्लेट फर्श पर चटाई बिछा लें।
- सबसे पहले आप सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं।
- अब अपने हथेली को कंधे के सीध में लाएं।
- दोनों पैरों के बीच एक फुट की दुरी रखें।
- पैरों के तलवे छत की और होने चाहिए।
- भुजंग आसन करते वक्त इस बात का खास ध्यान रखे की दोनों हाथों के पंजे, हमेशा दोनों कंधों के ठीक नीचे (ज़मीन पर) लगे होने चाहिए।
- अब साँस लेते हुए शरीर के अगले भाग को उठाएं।
- शरीर को इस तरह से उठाते हैं कि आपकी हथेली एवं कोहनी जमीन पर रहे।
- 10 सेकंड तक इस आसन को बनाए रखें।
- इस आसन के अभ्यास में यह आवश्यक है कि मेरुदण्ड खिंचा रहे और पूरी रीढ़ धनु समरूप रहे।
- इस पोज़ को मेन्टेन करते हुए धीरे धीरे सांस लें और धीरे धीरे सांस छोड़े।
- गहरी सांस छोडते हुए प्रारम्भिक अवस्था में आएं।
- भुजंगासन को 90 सेकेंड से ज़्यादा ना करें।
सावधानियाँ
भुजंगासन प्रातः काल खाली पेट करना लाभदायक मना जाता है। भुजंगासनमें इस आसन को करते समय अकस्मात् पीछे की तरफ बहुत अधिक न झुकें। इससे आपकी छाती या पीठ की माँस-पेशियों में खिंचाव आ सकता है तथा बाँहों और कंधों की पेशियों में भी बल पड़ सकता है जिससे दर्द पैदा होने की संभावना बढ़ती है। पेट में कोई रोग या पीठ में अत्यधिक दर्द हो तो यह आसन न करें
भुजंग आसन करते समय ध्यान रखें दोनों हाथों की हथेलियों पर एक समान बल पड़े। भुजंग आसन करते वक्त अपनें दोनों कंधों को सिकुडना नहीं है। हो सके उतना कंधों को फैलाये रखना है। आसन करते समय शरीर पर अनावश्यक बल का प्रयोग ना करें। सहज गति से आसन करें। यदि इस आसन को करते वक्त आपको पेट दर्द या शरीर के किसी अन्य शरीर में अधिक दर्द हो तो इस आसन को ना करे और चिकित्सक की सलाह लें।
यदि आपकी स्थिति गंभीर हैं तो भुजंग आसन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए। पेट दर्द की तकलीफ रहती हों तो यह आसन नहीं करना चाहिए। झटका दे कर पीठ को और सिर को पीछे की और नहीं मोड़ना चाहिए।

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