स्लिप डिस्क का आप जो भी उपचार ले रहे हों, उपचार अपनी जगह पर महत्वपूर्ण है लेकिन इसके साथ ही चलने फिरने और बैठने से सम्बंधित सावधानियां अपनी जगह जरुरी होती हैं। हर्निएटेड डिस्क हो जाने पर आपको छोटी से छोटी बातों का भी ध्यान रखना होता है। आज की इस पोस्ट में हम चिकित्सकों के बताये अनुसार स्लिप डिस्क के समय कैसे बैठा जाय इस विषय पर चर्चा करेंगे ताकि डिस्क और ज्यादा बल्ज ना हो और उसमें सुधार लाया जा सके। आयुर्वेद में बल्जिग डिस्क या हर्नियाटेड डिस्क को कटिशूल रोग के नाम से जाना जाता है। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है की खड़े होने की बजाय बैठे रहने पर कमर पर ज्यादा दबाव पड़ता है। यदि आप सही तरीके से नहीं बैठते हैं तो यह दबाव और अधिक दर्द का कारण बनता है। खराब बैठने का तरिका आपकी हर्निएटेड डिस्क पर और अधिक दबाव डालता है और दर्द बढ़ाता हैं । सामान्यतया एक धारणा होती है की बल्जिग डिस्क या हर्नियाटेड डिस्क कमर के पीछे की तरफ होती है, जिसे दबाने रगड़ने या फिर सही जगह पर लाने के लिए कई तरीके अपनाते हैं, लेकिन बल्जिग डिस्क या हर्नियाटेड डिस्क कमर के आगे की तरफ (पेट के हिस्से की तरफ ) होती है और इसी कारण से आगे झुक कर बैठने या फिर आगे की तरफ झुक कर कुछ उठाने से रोग ग्रस्त डिस्क पर और ज्यादा दबाव पड़ता है स्पाइन के नर्व्स पर दबाव आ जाता है जो कमर में लगातार होने वाले दर्द का कारण बनता है। बैठ कर काम करते वक़्त या सामान्य रूप से बैठते समय नीचे दी गयी बिंदुओं का ध्यान रखें
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