What is the Right Position to Sit in Slip Disc ? स्लिप डिस्क के समय कैसे बैठा जाय - Slip Disc Treatment at Home
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Thursday, August 23, 2018

What is the Right Position to Sit in Slip Disc ? स्लिप डिस्क के समय कैसे बैठा जाय

स्लिप डिस्क का आप जो भी उपचार ले रहे हों, उपचार अपनी जगह पर महत्वपूर्ण है लेकिन इसके साथ ही चलने फिरने और बैठने से सम्बंधित सावधानियां अपनी जगह जरुरी होती हैं।   हर्निएटेड डिस्क हो जाने पर आपको छोटी से छोटी बातों का भी ध्यान रखना होता है।  आज की इस पोस्ट में  हम चिकित्सकों के बताये अनुसार स्लिप डिस्क के समय कैसे बैठा जाय इस विषय पर चर्चा करेंगे ताकि डिस्क और ज्यादा बल्ज ना हो और उसमें सुधार लाया जा सके। आयुर्वेद में बल्जिग डिस्क या हर्नियाटेड डिस्क को कटिशूल रोग के नाम से जाना जाता है। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है की खड़े होने की बजाय बैठे रहने पर कमर पर ज्यादा दबाव पड़ता है। यदि आप सही तरीके से नहीं बैठते हैं तो यह दबाव और अधिक दर्द का कारण बनता है। खराब बैठने का तरिका आपकी हर्निएटेड डिस्क पर और अधिक दबाव डालता है और दर्द बढ़ाता हैं ।  सामान्यतया एक धारणा होती है की बल्जिग डिस्क या हर्नियाटेड डिस्क कमर के पीछे की तरफ होती है, जिसे दबाने रगड़ने या फिर सही जगह पर लाने के लिए कई तरीके अपनाते हैं, लेकिन बल्जिग डिस्क या हर्नियाटेड डिस्क कमर के आगे की तरफ (पेट के हिस्से की तरफ ) होती है और इसी कारण से आगे झुक कर बैठने या फिर आगे की तरफ झुक कर कुछ उठाने से रोग ग्रस्त डिस्क पर और ज्यादा दबाव पड़ता है स्पाइन के न‌र्व्स पर दबाव आ जाता है जो कमर में लगातार होने वाले दर्द का कारण बनता है। बैठ कर काम करते वक़्त या सामान्य रूप से बैठते समय नीचे दी गयी बिंदुओं का ध्यान रखें 
  • कुर्सी पर बैठते समय अपनी पीठ को सीधा रखें, पीठ को कुर्सी का सहारा देकर बैठे। कुर्सी में पीठ को धसाँ कर ना बैठे। पीठ में कर्व (गोलाई ) नहीं बनानी चाहिए। कुर्सी में सही तरीके का हेडरेस्ट होना चाहिए। घुटनों को फोल्‍ड न करें, कमर को बिलकुल झुकाएं नहीं।  अपने पावों को 90 डिग्री के कोण में फ्लैट फर्श पर रखें।  कोशिस करें की रीढ़ की हड्डी की s (एस आकार ) की बनावट बनी रहे। कुर्सी में लंबर सपोर्ट लगवाएं। अपनी पीठ और कुर्सी के बीच एक छोटा तकिया या तौलिये को गोल करके रखें।
  • जब कभी भी आप कुर्सी पर बैठे तो अपने हिप्स को जहां तक हो सके कुर्सी के पीछे वाले हिस्से तक ले जाएं। साथ ही कुर्सी को भी ज्यादा ऊंची ना रखें और कुर्सी को उतनी ही ऊंची रखें जितने में आपके पांव जमीन तक पहुंच सके। कुर्सी इतनी ऊंची होनी चाहिए कि आपके घुटने आपके हिप्स के बराबर हो।लेगा और स्‍ट्रेस भी दूर होगा। 
  • गाडी चलाते समय गाडी की सीट पर लंबर सपोर्ट एक्सेसरी का उपयोग करें जिससे कमर सीधी  रहे। सीट को इस प्रकार से एडजस्ट करें ताकि आगे ज्यादा झुकना ना पड़ें। 
  • कभी भी आगे की तरफ झुक कर ना बैठे ना की कोई काम करें ना ही कोई सामान उठाये चाहे वो हल्का हो या फिर भारी । अगर आप सिर्फ बैठकर काम करते है तो हर 30 मिनट के बाद 2 मिनट का ब्रेक लें कुछ दूर टहल कर आएं । लगातार बैठे न रहें। 

  • कन्धों को सीधा रखने की कोशिश करें और इसे अपनी आदद में शामिल करें, कन्धों को आगे की तरफ  लटका कर ना रखें।  गर्दन को भी एक ही दिशा में कई देर तक ना रखें क्यों की यह सिद्ध है की कमर में बल्ज या फिर हर्निएटेड डिस्क हो जाने पर सर्वाइकिल होने का ख़तरा और ज्यादा बढ़ जाता है। 
  • एक कहावत है 'कुर्सी जानलेवा है ' तो ज्यादा से ज्यादा चलने फिरने की कोशिश करे।  अपने शरीर को एक्टिव रखें।  शरीर का एक स्वस्थ वज़न बनाये रखें जिससे आपकी पीठ के निचले हिस्से पर दबाव कम हो सकता है। हताष होने से नुकसान  ही होगा, तो आइये एक आदत बनाते हैं सुबह शाम वाकिंग पर जाने की और दिन में ज्यादा से ज्यादा चलने की।  चलने से डिस्क पर दबाव घटता हैं और डिस्क में ज्यादा पोषण पहुँचता है।  मूविंग रहने से डिस्क में प्राकृतिक रूप से मसाज होता है, तो ज्यादा से ज्यादा चलते रहिये चलती का नाम ही गाडी है।  

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